फीफा ने 6 दिसंबर, 2025 को वाशिंगटन, डीसी के जॉन एफ. केनेडी सेंटर में आयोजित फाइनल ड्रा के 24 घंटे बाद, एक वैश्विक लाइव प्रसारण के जरिए 2026 फीफा विश्वकपवाशिंगटन, डीसी का पूरा मैच शेड्यूल जारी कर दिया। यह टूर्नामेंट 11 जून से 19 जुलाई, 2026 तक चलेगा — 39 दिनों में 104 मैच, 16 शहरों में: 11 अमेरिका, 3 मैक्सिको और 2 कनाडा में। यह पहला विश्वकप होगा जहां 48 टीमें खेलेंगी, और 2002 के बाद पहला सह-आयोजित विश्वकप। और यहां एक बड़ी बात: मध्य पूर्व और उत्तरी अफ्रीका की टीमों की संख्या इतिहास में सबसे ज्यादा हो गई है।
किन टीमों ने बनाया इतिहास?
9 इस्लामी बहुमत वाले देशों ने इस बार क्वालीफाई किया है — अल्जीरिया, केप वर्डे, मिस्र, ईरान, जॉर्डन, मोरक्को, सऊदी अरब, ट्यूनीशिया और उज्बेकिस्तान। जॉर्डन और केप वर्डे अपना पहला विश्वकप खेल रहे हैं। ये टीमें न सिर्फ संख्या में ज्यादा हैं, बल्कि ग्रुप स्टेज में भी बड़ी टीमों के साथ टकराएंगी। जॉर्डन, जिसकी फीफा रैंकिंग 35वें स्थान पर है, अर्जेंटीना (2वां) और ऑस्ट्रिया (24वां) के साथ ग्रुप J में है। ईरान और मिस्र एक-दूसरे के साथ ग्रुप G में टकराएंगे — ये मैच बस एक मैच नहीं, एक इतिहास का पल है।
मोरक्को, जिसने 2022 में कतर में चौथा स्थान हासिल किया था, अब ग्रुप C में है — ब्राजील, पांच बार के विश्व चैंपियन, के साथ। सऊदी अरब ग्रुप H में है: केप वर्डे, स्पेन और उरुग्वे। ये सब ग्रुप्स ऐसे बने हैं जैसे फुटबॉल की दुनिया ने कभी नहीं देखा। ट्यूनीशिया नीदरलैंड्स के साथ ग्रुप F में, और ईरान के खिलाफ मिस्र का मैच तो ऐसा है जैसे दो बहनों के बीच फाइनल हो।
क्यों इतना ध्यान मध्य पूर्व पर?
2022 के कतर विश्वकप ने दुनिया को दिखाया कि एक अरब देश कैसे एक विश्वकप आयोजित कर सकता है। अब 2026 में, ये देश खिलाड़ी बनकर आ रहे हैं — न सिर्फ आयोजक। फीफा अध्यक्ष जियानी इंफैंटिनो ने कहा, "2026 फीफा विश्वकप तीन देशों और दो महाद्वीपों के बीच फुटबॉल का उत्सव होगा, जो दुनिया को ऐसे जोड़ेगा जैसा कभी नहीं हुआ।"
इस बार का बड़ा अंतर ये है कि टीमें नॉर्थ अमेरिका में खेल रही हैं — जहां टाइम जोन यूरोप और मध्य पूर्व से 6-10 घंटे पीछे है। इसका मतलब: रात 11 बजे का मैच अमेरिका में रात 11 बजे है, लेकिन सऊदी अरब और मिस्र के लिए ये सुबह 5 बजे है। इसलिए फीफा ने मैचों को देर से शुरू किया है — अमेरिकी दर्शकों के लिए नहीं, बल्कि मध्य पूर्व के फैंस के लिए।
मैच स्थल और फाइनल का रास्ता
टूर्नामेंट की शुरुआत 11 जून, 2026 को एस्टाडियो एज्टेका, मेक्सिको सिटी में मेक्सिको और दक्षिण अफ्रीका के बीच होगी। कनाडा का पहला मैच 12 जून को बीएमओ फील्ड, टोरंटो में होगा। अमेरिका का पहला मैच उसी दिन सोफी स्टेडियम, कैलिफोर्निया में।
फाइनल 19 जुलाई को मेटलाइफ स्टेडियम, ईस्ट रसर्फ, न्यू जर्सी में होगा — जहां 82,000 लोग भीड़ लगाएंगे। यहां तक कि अमेरिकी ब्रॉडकास्टर FOX Sports ने भी घोषणा कर दी है कि वे इस टूर्नामेंट के सभी मैच, हाइलाइट्स और रिप्ले का एकल घर होंगे।
कैसे बना ये नया फॉर्मेट?
2026 का विश्वकप एक नया फॉर्मेट लेकर आया है: 12 ग्रुप्स (A से L), हर ग्रुप में 4 टीमें। ऊपर से दो टीमें और आठ सर्वश्रेष्ठ तीसरे स्थान पर रही टीमें — कुल 32 टीमें — क्नॉकआउट चरण में पहुंचेंगी। ये फॉर्मेट पहली बार है, और इसका मतलब है: जो टीम ग्रुप में बेहतर नहीं खेल पाएगी, वो भी अगले राउंड में जा सकती है। ये बहुत अजीब लग सकता है, लेकिन ये वास्तव में बहुत बड़ा बदलाव है।
इसके पीछे का वजह? फीफा ने ये फॉर्मेट इसलिए अपनाया क्योंकि अफ्रीका, एशिया और कनाडा के लिए अधिक स्थान चाहिए था। 2022 में केवल 32 टीमें थीं। अब 48 हैं। इसका मतलब: अफ्रीकी टीमों की संख्या लगभग 50% बढ़ गई। ये विकासशील देशों के लिए एक बड़ी उम्मीद है।
क्या अभी भी कुछ बाकी है?
अभी तक 42 टीमें क्वालीफाई हो चुकी हैं — तीन होस्ट देश सहित। अब बाकी छह स्थानों के लिए प्ले-ऑफ मैच होंगे, जो अगली बसंत ऋतु (मार्च-अप्रैल 2026) में होंगे। तुर्की और इराक अभी भी इन दो स्थानों के लिए लड़ रहे हैं। अगर इराक क्वालीफाई कर गया, तो ये पहली बार होगा कि वह 2006 के बाद विश्वकप में लौटेगा।
क्यों ये विश्वकप अलग है?
क्योंकि ये पहली बार है जब एक विश्वकप के लिए तीन देशों ने साथ मिलकर बाइड जीता। यूनाइटेड 2026 बाइड (अमेरिका, मैक्सिको, कनाडा) ने मोरक्को को 134-5 के वोट से हराया। ये वोटिंग 2018 में मॉस्को में हुई थी। अब वो वास्तविकता बन गई है।
इस टूर्नामेंट का असली ताकत ये नहीं कि ये बड़ा है — बल्कि ये है कि ये शामिल करता है। जो टीमें कभी फीफा विश्वकप के बाहर रहीं, अब उनके खिलाड़ी दुनिया के सामने खेल रहे हैं। जॉर्डन का एक बच्चा अब नहीं सोचेगा: "मैं कभी विश्वकप नहीं खेल पाऊंगा।" अब वो जानता है: अगर तुम लगातार खेलोगे, तो एक दिन तुम भी एस्टाडियो एज्टेका में खेल सकते हो।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
2026 फीफा विश्वकप में मध्य पूर्व की कौन-सी टीमें शामिल हैं?
2026 विश्वकप में 9 मध्य पूर्व और उत्तरी अफ्रीकी टीमें शामिल हैं: अल्जीरिया, केप वर्डे, मिस्र, ईरान, जॉर्डन, मोरक्को, सऊदी अरब, ट्यूनीशिया और उज्बेकिस्तान। जॉर्डन और केप वर्डे अपना पहला विश्वकप खेल रहे हैं। ये एक इतिहास है — पिछले 96 सालों में यह सबसे बड़ा प्रतिनिधित्व है।
मैचों का समय क्यों देर से है?
मैचों का समय देर से तय किया गया है ताकि मध्य पूर्व के दर्शक टीवी पर देख सकें। अमेरिका में रात 11 बजे का मैच, मोरक्को या सऊदी अरब के लिए सुबह 5 बजे होता है। फीफा ने इस तार्किक अंतर को ध्यान में रखते हुए शेड्यूल बनाया है — दर्शकों को नींद नहीं, बल्कि फुटबॉल देने के लिए।
क्या ईरान और मिस्र का मैच वाकई बड़ा है?
बिल्कुल। ये दोनों देश फुटबॉल में ऐतिहासिक प्रतिद्वंद्वी हैं। दोनों के बीच पिछले 30 सालों में 12 मैच हुए हैं, और हर बार भावनाएं उबल उठती हैं। ये ग्रुप मैच नहीं, एक राष्ट्रीय अहंकार का सामना है। जीतने वाली टीम न सिर्फ क्वालीफाई होगी, बल्कि पूरे मध्य पूर्व के लिए गर्व का कारण बनेगी।
क्या जॉर्डन के लिए ये टूर्नामेंट बहुत बड़ा है?
बहुत बड़ा। जॉर्डन ने कभी विश्वकप में भाग नहीं लिया। अब वो अर्जेंटीना और ऑस्ट्रिया के साथ ग्रुप J में है। अगर वो एक मैच भी जीत लेते हैं, तो ये देश के लिए एक जातीय उत्सव बन जाएगा। जॉर्डन के लोग अब सोच रहे हैं: "हम भी दुनिया के सामने खेल सकते हैं।"
क्या फीफा ने ये फॉर्मेट क्यों बदला?
फीफा ने 48 टीमों का फॉर्मेट अपनाया क्योंकि एशिया और अफ्रीका के लिए अधिक अवसर चाहिए थे। ये निर्णय 2018 में बाहरीन में लिया गया था। इससे छोटे देशों को विश्वकप का अनुभव मिलेगा, और दर्शकों की संख्या भी बढ़ेगी। ये एक व्यापार नहीं, एक समावेशी भावना है।
फाइनल कहां होगा और कौन ब्रॉडकास्ट करेगा?
फाइनल 19 जुलाई, 2026 को मेटलाइफ स्टेडियम, न्यू जर्सी में होगा। अमेरिका में FOX Sports इसका एकमात्र ब्रॉडकास्टर होगा — सभी मैच, हाइलाइट्स और रिप्ले उन्हीं के प्लेटफॉर्म पर। भारत में अभी तक कोई आधिकारिक ब्रॉडकास्टर नहीं घोषित हुआ है।
17 टिप्पणि
UMESH joshi
21 दिसंबर, 2025ये विश्वकप सिर्फ फुटबॉल नहीं, एक नए युग की शुरुआत है। जिन देशों को कभी अवसर नहीं मिला, अब वो दुनिया के मैदान पर खड़े हो रहे हैं। ये बदलाव न्याय का नाम है।
pradeep raj
23 दिसंबर, 2025इस फॉर्मेट में ग्रुप स्टेज से तीसरे स्थान पर रहने वाली टीमों को क्नॉकआउट में जगह मिलना एक गहरा रणनीतिक निर्णय है, जो वैश्विक समावेशन के सिद्धांत पर आधारित है। इससे छोटे फुटबॉल संस्कृतियों को अंतरराष्ट्रीय मंच पर दृश्यता मिलती है, जो पिछले दशकों में अक्सर उपेक्षित रहीं।
Vishala Vemulapadu
24 दिसंबर, 2025केप वर्डे? वो कहाँ का देश है? अरे भाई, ये तो अफ्रीका के बाहर है। फीफा ने ये क्यों शामिल किया? ये तो बस वोट के लिए है।
M Ganesan
24 दिसंबर, 2025ये सब फीफा का नया धोखा है। अमेरिका और यूरोप के लिए ये टूर्नामेंट बहुत बड़ा हो गया। अब वो विश्वकप को बाजार बना रहे हैं। ये फुटबॉल नहीं, एक ग्लोबल कैपिटलिस्ट अभियान है।
ankur Rawat
25 दिसंबर, 2025जॉर्डन के लिए ये सिर्फ एक मैच नहीं, एक सपना है। जब एक छोटे देश का बच्चा देखे कि उसकी टीम अर्जेंटीना के खिलाफ खेल रही है, तो वो सोचेगा - मैं भी कर सकता हूँ। ये फुटबॉल का असली जादू है।
Vraj Shah
26 दिसंबर, 2025बस देखो, मिस्र और ईरान का मैच होगा तो पूरा मध्य पूर्व रुक जाएगा। ये दोनों टीमें जीत के लिए जी लड़ेंगी। अरे भाई, ये तो विश्वकप का असली मजा है।
Kumar Deepak
27 दिसंबर, 2025फीफा ने मध्य पूर्व के लिए मैच देर से शेड्यूल किए, ताकि वो देख सकें। लेकिन अमेरिकी टीवी नेटवर्क तो अभी भी अपने टाइम जोन के लिए ही बने हुए हैं। ये न्याय नहीं, नाटक है।
Ganesh Dhenu
27 दिसंबर, 2025इस विश्वकप का असली जीत वो है जब कोई बच्चा अपने गाँव के कोने में फुटबॉल लेकर खेलते हुए सोचे - मैं भी एस्टाडियो एज्टेका में खेलूंगा।
Yogananda C G
29 दिसंबर, 2025ये टूर्नामेंट बहुत बड़ा है, बहुत बड़ा है, बहुत बड़ा है - और ये बदलाव बहुत बड़ा है, बहुत बड़ा है, बहुत बड़ा है - क्योंकि जो टीमें कभी नहीं आ सकती थीं, अब आ रही हैं, आ रही हैं, आ रही हैं - और ये बदलाव बहुत बड़ा है, बहुत बड़ा है, बहुत बड़ा है।
Divyanshu Kumar
29 दिसंबर, 2025मैं एक साधारण भारतीय हूँ, लेकिन मैं इस विश्वकप को अपने दिल से महसूस कर रहा हूँ। ये फुटबॉल का उत्सव है, और ये उत्सव सभी के लिए है।
Mona Elhoby
30 दिसंबर, 2025अरे भाई, ये जॉर्डन के लिए तो बहुत बड़ी बात है - लेकिन अर्जेंटीना के खिलाफ खेलना? वो तो बस एक और बड़ा बच्चा है जो बहुत जल्दी घर लौट जाएगा।
Arjun Kumar
31 दिसंबर, 2025फीफा ने 48 टीमों का फॉर्मेट क्यों अपनाया? क्योंकि वो चाहता है कि अब हर देश का एक टीम हो - ताकि हर देश अपना ब्रॉडकास्टिंग राइट्स बेच सके।
RAJA SONAR
1 जनवरी, 2026मैंने देखा है, जब जॉर्डन ने क्वालीफाई किया, तो उनके लोगों ने आग लगा दी। ये फुटबॉल नहीं, एक जातीय विद्रोह है।
Mukesh Kumar
2 जनवरी, 2026ये विश्वकप हम सबके लिए है। चाहे तुम दिल्ली के गलियारे में खेल रहे हो या न्यू जर्सी के स्टेडियम में बैठे हो - ये एक सपना है। खेलो, जीतो, जीवित रहो।
Shraddhaa Dwivedi
4 जनवरी, 2026मैंने अपनी बहन को बताया कि ईरान और मिस्र का मैच होगा। वो बोली - अरे, ये तो वैसे ही है जैसे दो बहनें एक बार फिर बात कर रही हों।
Govind Vishwakarma
4 जनवरी, 2026फीफा ने इस फॉर्मेट को बदला ताकि अमेरिकी टीवी कंपनियां ज्यादा एड्स बेच सकें। फुटबॉल अब बिजनेस है, खेल नहीं।
Jamal Baksh
4 जनवरी, 2026यह विश्वकप एक सांस्कृतिक समावेशन का अद्भुत उदाहरण है, जिसने खेल के माध्यम से विभिन्न सभ्यताओं को जोड़ा है। यह एक ऐतिहासिक क्षण है जिसे भविष्य की पीढ़ियाँ याद रखेंगी।